1.
गहरे में विचारिये कि आपको क्यों कामयाबी
मिलनी चाहिये.
2.
हर अच्छी इमारत का एक निश्चित नक्शा होता है
ठीक इसी प्रकार आप भी अपनी सफलता की इमारत का एक निश्चित नक्शा बनाइये.
3.
निश्चित कीजिये कि आप अपने कामकाज में किस
ऊंचाई तक पहुँचना चाहते हैं.
4.
आपकी सोचने की शक्ति आपकी सच्ची संपत्ति है,
इसके (अपनी सोचने की शक्ति के) विकास पर निरंतर मेहनत करते रहिये.
5.
कामयाब और स्पष्ट सोच वाले व्यक्तियों का
सफलता का नक्शा अपने भीतर स्पष्ट और गहरा ज्ञान संजोये होता है.
6.
सफलता के निश्चित नक़्शे के बिना अक्सर लोग
असफल हो जाते हैं.
7.
आपका सफलता का नक्शा, आपके हाव-भाव और कामकाज
के तरीकों से स्पष्ट हो जाता है.
8.
आपका सफलता का नक्शा जितना ज्यादा स्पष्ट
होगा उतना ही आप आत्म विश्वास से भरे होंगे और सरलता एवं सहजता अपने आप ही आपके
व्यक्तित्व में आ जाएँगी.
9.
आपके बाहरी जीवन में सफलता का आकार, आपके
सफलता के मानसिक नक़्शे के आकार के अनुरूप होता है.
10.
आज ही अपने सफलता के नक़्शे में एक शानदार
विज़न, मिशन, स्पष्ट जीवन मूल्य और चुनौतीपूर्ण लक्ष्यों को शामिल कर लीजिये.
11.
इस शानदार दुनिया में किसी भी व्यक्ति के लिए
किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं है.
12.
जितना खुला और बड़ा आप सोचेंगे उतना ही बड़ा
परिणाम आपको प्राप्त होगा.
13.
आप सफलता से दूर हैं सफलता आपसे दूर नहीं
हैं.
14.
जितनी प्रचुरता से आप दूसरों को देंगे उतनी
ही प्रचुरता से आपको प्राप्त होगा.
15.
आज जो भी आप हैं और जितना भी आपके पास है
उसके लिए ईश्वर को धन्यवाद दीजिये और ऐसा करके आप पायेंगे कि आपने खुद ही प्रचुरता
के मार्ग पर चलना शुरू कर दिया है.
16.
कागज़ और पेन लीजिये और लिखिये कि आप जीवन में
कहाँ तक जा सकते हैं.
17.
आपकी सफलता की कोई अंतिम सीमा नहीं है
क्योंकि आपके आत्म सुधार की भी कोई अंतिम सीमा नहीं है, आप जितना मर्ज़ी प्राप्त कर
सकते हैं क्योंकि यह सृष्टि पूरी तरह आपके साथ है.
18.
आप पाने के बजाय दूसरों को देने पर ध्यान
केन्द्रित कीजिये और जीवन में समृद्धि के नियम का भरपूर आनंद लीजिये.
19.
सृष्टि हर उस व्यक्ति के लिए अपने ख़जाने खोल
देती है जो प्रकृति के नियमों का दिल से पालन करते हुए मानवता की सच्ची सेवा करता
है.
20.
शांति से बैठ कर सोचिये कि ईश्वर ने आपको
बिना मांगे कितना कुछ दिया है.
21.
आप जीवन को प्रचुरता और समृद्धि से सजे एक
उपहार की तरह देखिये.
22.
आपके और समृद्धि के सिद्धांत के बीच में बस
एक ही बाधा है और वह है आपका स्थिति को देखने का प्रचुरता-रहित एवं
शुक्रगुजारी-रहित नज़रिया.
23.
ईश्वर ने इंसान को असीमित संभावनाओं के साथ
धरती पर एक शानदार जीवन का सच्चा आनंद लेने के लिए भेजा है.
24.
हम सभी के लिए सब कुछ सदा से प्रचुर मात्रा
में मौजूद है बस हमें तो अपनी आँखें खोलनी हैं.
25.
जीवन में आपके पास जीवन को देखने के हर पल दो
नजरिए होते हैं एक तो यह कि जीवन में मेरे पास सब कुछ है और दूसरा यह कि मेरे पास
तो कुछ भी नहीं हैं.
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